कनाडा से खालिस्तानी हिंसा को मिलती है फंडिंग, CSIS रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताया

लुधियाना

कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) की ताजा रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थकों को कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी को खतरा बताया है। यही नहीं रिपोर्ट में यह भी बात सामने आई कि खालिस्तान समर्थक कनाडा में फंड जुटाकर भारत में हिंसा फैलाते हैं।
CSIS ने एक मई को एक पब्लिक रिपोर्ट-2025 जारी की, जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा है कि खालिस्तान समर्थक कनाडाई नागरिकों से जुड़कर यहां की संस्थाओं का फायदा उठाते हैं। वो कनाडा में सिख संगठनों व आम लोगों से फंड जुटाते हैं। लोग उन्हें धार्मिक कार्यों के लिए फंड देते हैं, लेकिन वो उसका इस्तेमाल बाद में हिंसक गतिविधियों में करते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा है कि कनाडा में खालिस्तान समर्थकों का एक छोटा सा ग्रुप है। CSIS ने 49 पेजों की रिपोर्ट जारी की है, जिसके पेज नंबर पर 25 पर कनाडा बेस्ड खालिस्तान एक्सट्रिमिस्ट (CBKE) यानि कनाडा में रहने वाले खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियों के बारे में लिखा है।

CSIS की रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थकों के लिए क्या-क्या लिखा, जानिए..
एयर इंडिया हमले का जिक्र: रिपोर्ट में 1985 के एयर इंडिया फ्लाइट-182 बम विस्फोट की 40वीं वर्षगांठ का खास उल्लेख है। CSIS ने इसे कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला बताया, जिसमें 329 लोग मारे गए थे। हमले के संदिग्ध कनाडा-आधारित खालिस्तान समर्थक चरमपंथी संगठनों से जुड़े थे।

खालिस्तान समर्थक संगठनों पर सख्त रुख: रिपोर्ट में पॉलिटिकली मोटिवेटेड वायलेंट एक्सट्रीमिज्म (PMVE) की विस्तार से चर्चा की गई है। CSIS ने लिखा है कि 2025 में कनाडा में कनाडा बेस्ड खालिस्तान एक्सट्रिमिस्ट (CBKE) से जुड़ा कोई हमला नहीं हुआ, लेकिन CBKE की हिंसक गतिविधियां लगातार कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा बनी हैं।

फंडिंग और भारत में हिंसा का खुलासा: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कुछ CBKE कनाडाई नागरिकों से जुड़कर कनाडा की संस्थाओं का फायदा उठाते हैं और अनजान समुदाय के लोगों से फंड इकट्ठा करते हैं। यह फंड बाद में भारत में हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल होता है। CSIS ने स्पष्ट किया कि केवल एक छोटा समूह कनाडा को आधार बनाकर मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, फंड जुटाने और हमलों की योजना बनाने का काम करता है। इन्हीं लोगों को खालिस्तानी एक्सट्रिमिस्ट माना जाता है।

कनाडा में खालिस्तान की मांग पर आपत्ति नहीं: रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में खालिस्तान राज्य की मांग के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अभियान चलाना चरमपंथ नहीं है। CSIS केवल हिंसा और फंडिंग वाले हिस्से को खतरा मानती है।

कनाड़ा में 2025 में 12 नए आतंकी संगठन: CSIS की मदद से कनाडा सरकार ने इस साल 12 नए संगठनों को आतंकवादी घोषित किया, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग, 764, मेनियक मर्डर कल्ट, टेररग्राम कलेक्टिव आदि शामिल हैं।

आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा पर चिंता: रिपोर्ट में 2025 को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बदलाव का साल बताया गया। बढ़ती जियो पॉलिटिकल टेंशन और नई तकनीकों की होड़ से कनाडा की सुरक्षा को खतरा बढ़ा है। विदेशी राज्य खुलेआम और गुप्त तरीके से कनाडा के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

बैंकिंग क्षेत्र को अलर्ट: CSIS ने बैंकिंग और बीमा कंपनियों को विदेशी हस्तक्षेप पर ब्रिफिंग दी। ऑफिस ऑफ द सुपरिंटेंडेंट ऑफ फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस (OSFI) के साथ मिलकर नेशनल सिक्योरिटी थ्रेट फोरम बनाया गया है, ताकि वित्तीय क्षेत्र मजबूत बना रहे।

क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ता खतरा: रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रिप्टोकरेंसी अब सुरक्षा के लिए नया खतरा बन गई है। विदेशी कंपनियों की पहचान छुपाकर मार्केट में क्रिप्टो करंसी के जरिए हेराफेरी कर रहे हैं, जो दुश्मनों के लिए खतरनाक हथियार साबित हो सकता है। इस पर नकेल कसे जाने की जरूरत है। CSIS आतंकवादी फंडिंग की जांच, नए पैटर्न का विश्लेषण और FINTRAC, वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है।

खालिस्तान समर्थकों पर CSIS की नजर: CSIS की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि कनाडा खालिस्तानी चरमपंथ, फंडिंग के जरिए भारत में हिंसा की योजना और आर्थिक जासूसी को बहुत गंभीर चुनौती मानता है। एजेंसी इन सभी खतरों पर लगातार नजर रख रही है और जरूरी कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

रिपोर्ट के आधार पर कनाडा सरकार बनाएगी नीतियां
कनेडियन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार CSIS की रिपोर्ट पर संसद व मंत्री समीक्षा करेंगे। एजेंसी ने रिपोर्ट पब्लिक सेफ्टी मिनिस्टर को सौंप दी है और संसद में इसे पेश किया जाएगा। उसके आधार पर सरकार खालस्तानी कट्‌टपंथियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की पॉलिसी तैयार कर सकती है।

विक्रमजीत साहनी बोले- PM मोदी के प्रयासों से हुआ
आप से भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी ने कनाडा के इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि उग्रवादी तत्वों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करना बेहतर कदम है। उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है और भारत के निरंतर कूटनीतिक प्रयासों को दर्शाता है।

साहनी ने कहा कि यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण हुआ है। उन्होंने इस मुद्दे को लगातार और मजबूती से वैश्विक मंचों पर अपने समकक्षों के सामने उठाया। यह भी स्पष्ट करता है कि ऐसे तत्व बेहद छोटे और हाशिए पर मौजूद समूह हैं, जिनका बड़े समुदाय द्वारा अपनाए गए शांति के मूल्यों से कोई संबंध नहीं है।

 

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कर्म सिद्धांत का रहस्य: महाभारत की कथा में श्रीकृष्ण ने समझाया जीवन का न्याय

अक्सर हमारे मन में यह सवाल उठता है कि आखिर भगवान दुनिया में न्याय कैसे करते हैं? क्योंकि कई बार बुरा काम करने वाले लोग सुख, धन और सफलता का आनंद लेते नजर आते हैं, जबकि सच्चे-अच्छे इंसान संघर्ष और दुखों से घिरे रहते हैं? क्या ईश्वर वास्तव में पक्षपात करते हैं, या इसके पीछे कोई गहरा नियम छिपा है? हिंदू धर्म और शास्त्रों में कर्म और उसके फल का सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. इसी सत्य को समझाने के लिए महाभारत की एक कथा हमें जीवन के हर कर्म का फल के बारे में बताती है. आइए जानते हैं उस कथा के बारे में.

अर्जुन और श्रीकृष्ण का प्रसंग
महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था. एक दिन अर्जुन और श्रीकृष्ण पैदल कहीं जा रहे थे. तभी अर्जुन की नजर जमीन पर पड़ी एक चींटी पर गई. उस चींटी का आधा शरीर कुचला हुआ था. वह अत्यंत पीड़ा में थी, फिर भी अपने मुंह में एक छोटा सा अनाज का दाना दबाए, अपने कटे हुए शरीर को घसीटते हुए आगे बढ़ रही थी. यह दृश्य देखकर अर्जुन का हृदय द्रवित हो गया. उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा, 'प्रभु, आप तो करुणा के सागर हैं, फिर इस छोटी सी चींटी को इतना भयानक कष्ट क्यों? क्या आपको इस पर दया नहीं आती?'

श्रीकृष्ण मुस्कुराए और बोले, 'हे पार्थ, यह कोई साधारण चींटी नहीं है. अपने पिछले जन्म में यह देवराज इंद्र था- देवताओं का राजा. लेकिन इसने अपने पद का दुरुपयोग किया, ऋषि-मुनियों को कष्ट दिया, प्रजा पर अत्याचार किया और अपने कर्तव्यों को भूलकर भोग-विलास में डूबा रहा. आज जो इसकी अवस्था है, वह उसी कर्म का फल है.'

श्रीकृष्ण आगे बोले, 'ध्यान से समझो- जो लोग दान, धर्म और अच्छे कर्म करते हैं, उनका पुण्य कभी व्यर्थ नहीं जाता है. बस उसके फल के लिए धैर्य रखना पड़ता है. और जो लोग आज धन, पद और प्रतिष्ठा में डूबे हुए हैं, लेकिन दूसरों को सताते हैं, लूटते हैं- वे भी अपने कर्मों के फल से बच नहीं सकते हैं. इस संसार में कोई भी अपने कर्मों के परिणाम से अछूता नहीं है. जब मैं स्वयं भी कर्म के नियम से बंधा हूं, तो फिर तुम और अन्य मनुष्य कैसे इससे बच सकते हैं?'

इसलिए, बिना वजह किसी भी मनुष्य या जीव को पीड़ा देने से पहले दस बार सोचिए. क्योंकि पीड़ित के हृदय से निकली हुई आह कभी व्यर्थ नहीं जाती है. हो सकता है आज आपके पास पद, पैसा और प्रतिष्ठा हो, लेकिन क्या यह सब हमेशा रहेगा?

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वन विभाग की नई योजना, मानसून से पहले ही शुरू होगा पौधरोपण अभियान

 रांची

 झारखंड में वन क्षेत्र के अलावा औषधीय पार्क, सामुदायिक स्थल पर लगाने के लिए तीन लाख पौधे तैयार हैं। वन विभाग आमतौर पर जुलाई से पौधरोपण प्रारंभ करता है, लेकिन अप्रैल के आखिरी सप्ताह से राज्य में बारिश हो रही है।

विभाग की नर्सरी में तैयार पौधों को औषधीय पार्क, स्कूल, आवासीय सामुदायिक भूखंड पर लगाया जाएगा। ये पौधे अनुदानित दर पर लोगों को दिए जाएंगे। इसके अलावा वन भूमि पर इस वर्ष दस लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना है।

कृषि विश्वविद्यालय स्थित वानिकी संकाय के विशेषज्ञ ज्ञानरंजन पांडेय ने बताया कि लोहरदगा से लेकर डाल्टेनगंज तक पिछले दस सालों में लाखों आंवला के पेड़ लगाए गए हैं

आयुर्वेद से जुड़ी कंपनियों ने झारखंड में उत्पादित आंवला को उच्च गुणवत्ता वाला माना है। इस वर्ष आंवला और जामुन के पौधे पार्कों और सामुदायिक स्थलों पर लगाए जाएंगे। राज्य में छह औषधीय पार्क बनाकर उनमें वेलनेस उत्पाद में प्रयुक्त होने वाले फलदार पौधे लगाए जाएंगे।

पांच साल पहले लगे पौधों की उत्तरजीविता बढ़ी
राज्य के वन क्षेत्र में पांच साल पहले जो पौधे लगाए गए थे, उनमें से 80 प्रतिशत अब वृक्ष का स्वरूप ले रहे हैं। केंद्रीय वन उत्पादकता संस्थान ने राज्य में पौधों के संरक्षण की उत्तम श्रेणी की रिपोर्ट दी है।

केंद्रीय संस्थान पांच वर्ष में पौधों की वृद्धि, उनके आसपास की हरियाली और सुरक्षा का आकलन कर रिपोर्ट देती है। पिछले दो सालों से हुई बारिश ने भी पौधों की वृद्धि में योगदान दिया है।

130 एकड़ नई भूमि पौधरोपण के लिए चिह्नित
वन एवं पर्यावरण विभाग ने 130 एकड़ नई वन भूमि में मानसून के दौरान पौधरोपण की योजना बनाई है। इनमें सामाजिक वानिकी और क्षतिपूर्ति वानिकी योजना के तहत पौधे लगाए जाएंगे। विभाग ने इस वर्ष अतिक्रमण मुक्त की गई भूमि पर भी पौधरोपण की तैयारी की है।

 

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दिग्गज नेता रमेश चेन्निथला ने हरिपाड़ सीट जीती, CPI उम्मीदवार को करारी हार

केरल

केरल में 140 सीटों वाली विधानसभा चुनाव में मतों की गिनती जारी है। कांग्रेस के दिग्गज नेता रमेश चेन्निथला ने हरिपाड़ (Haripad) विधानसभा सीट से 23,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज कर ली है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार उन्हें आधिकारिक रूप से विजयी घोषित कर दिया गया है।

12 मंत्री भी पीछे चल रहे

रुझानों में जहां सीएम पिनाराई विजयन समेत लगभग 12 मंत्री भी अपनी प्रतिद्वदियों से पीछे चल रहे हैं। यहां कांग्रेस गठबंधन यूडीएफ की सरकार बनते दिख रही है। सीएम विजयन अपने प्रतिद्वंदी वी पी अब्दुल रशीद से पीछे चल रहे हैं।

निर्वाचन क्षेत्र नाम उम्मीदवारों के नाम वोट शेयर

मलप्पुरम
केरलम
पी.के कुन्हालीकुट्टी
आईयूएमएल
7,185 70.83% लीड

Puthuppally
केरलम
सलाह. चांडी ओमन
कांग्रेस
10,740 65.51 % लीड

मांकड़ा
केरलम
मंजलमकुझी अली
आईयूएमएल
18,480 65.32% लीड

एर्नाड
केरलम
पी.के.बशीर
आईयूएमएल
6,194 65.24 % लीड

एर्नाकुलम
केरलम
टी जे विनोद
कांग्रेस
4,450 60.58% लीड

कन्नूर
केरलम
वकील टी.ओ. मोहनन
कांग्रेस
6,884 59.55% लीड

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बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन से बुलाया विशेष सत्र, झामुमो ने किया पलटवार

 रांची

 नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नारी शक्ति वंदन पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने रविवार को प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता कर कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा गया था जो नहीं मिला।

मरांडी ने कहा कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय लेने का प्रयास किया जा रहा था। समय नहीं मिलने पर उनको एक पत्र लिखकर ही सारी बातों से अवगत करा दिया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने 16, 17, 18 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में लाया था। इससे देश की आधी आबादी के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33% सीटें उनके लिए आरक्षित होगी।

झारखंड में 14 लोकसभा की सीटें बढ़कर 21 हो जाती। जिसमें सात महिलाओं के लिए रिजर्व होती। इसी प्रकार विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जाती।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसके विरोध में मतदान किया। इसलिए पार्टी ने तय किया था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उनसे पार्टी आग्रह करेगी कि इस मुद्दे पर राज्यपाल की सहमति से एक विशेष सत्र बुलाएं और सदन से पारित कराकर केंद्र को प्रस्ताव भेजें।

झामुमो का पलटवार
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात का समय नहीं मिलने के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोप पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पलटवार किया है। महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास निरर्थक सवालों के लिए समय नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई सकारात्मक एजेंडा हो तो सरकार संवाद के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर मुलाकात की अपेक्षा उचित नहीं है।

भट्टाचार्य ने नगर निकाय चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी की है। इसके बावजूद विपक्ष महिलाओं के नाम पर राजनीति कर उन्हें गुमराह कर रहा है।

 

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बंगाल काउंटिंग के दौरान दीदी का भरोसा बरकरार, घर के बाहर गूंजे ‘जय श्रीराम’

कोलकत्ता

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम की तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ हो रही है। दोपहर 1 बजे तक की काउंटिंग में बीजेपी जबरदस्त बहुमत हासिल कर ली है। बीजेपी 191 सीटों पर आगे चल रही है। जबकि ममता बनर्ती की टीएमसी 95 सीटों पर सिमटती हुई दिख रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक भाजपा 187 और टीएमसी 92 सीटों पर आगे चल रही है। जबरदस्त जीत होता देख बीजेपी कार्यकर्ता सड़कों पर उतकर जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया है। ममता बनर्जी के घर के बाहर बीजीपी कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम के नारे लगाए। वहीं काउंटिंग के बीच सीएम ममता बनर्जी का बयान सामने आया है। दीदी ने टीएमसी कैंडिडेट और कार्यकर्ताओं से बूथ नहीं छोड़ने की अपील की है।

पश्चिम बंगाल में चुनाव में रुझानों में बड़ी जीत की संभावना के बीच बीजेपी के कुछ कार्यकर्ता ममता के घर पहुंच गए। इन लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए।

वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव मतगणना के बीच ममता बनर्जी ने पहला बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि हमें काउंटिंग सेंटर जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से काउंटिंग सेंटर्स न छोड़ने को कहा है। टीएमसी के कार्यकर्ता काउंटिंग सेंटर्स को न छोड़ें क्योंकि अभी सिर्फ 4 राउंड की गिनती हुई है। ममता बनर्जी ने दावा किया है कि आखिरी राउंड के बाद टीएमसी ही जीतेगी।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा- “काउंटिंग एजेंट और उम्मीदवार काउंटिग सेंटर छोड़कर न आएं। यह भाजपा का प्लान है, मैं कल से ही बोल रही हूं पहले उन्हें आगे दिखाया जाएगा। कई जगह उन्होंने काउंटिंग को बंद कर रखा है। कल्याणी में ऐसी मशीनें मिली हैं जहां कोई मेल नहीं है, सेंट्रल फोर्स के जरिए हर तरफ से TMC पर अत्याचार हो रहा है।

सब गलत बताया जा रहा है- ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने कहा- “SIR के जरिए उन्होंने वोट लूटने की कोशिश की और अब भी 100 से ज्यादा सीटों पर हम आगे हैं जिसे बताया नहीं जा रहा। सब गलत बताया जा रहा है। पूरी तरह चुनाव आयोग अपनी इच्छा से काम कर रहा है और उनके साथ सेंट्रल फोर्स भी है। सेंट्रल फोर्स के साथ पुलिस भी काम कर रही है। मैं पार्टी कार्यकर्ताओं को कहती हूं कि मन खराब करने की जरूरत नहीं है, आप सूर्यास्त के बाद जीतेंगे। 2-4 राउंड की गिनती हुई है, 14-18 राउंड तक गिनती होती है, हम जीतेंगे। किसी को डरने की कोई जरूरत नहीं है।

 कोलकाता पुलिस ने जीत के जश्न पर लगाई रोक
कोलकाता पुलिस ने जीत के जश्न पर रोक लगा दी है। दरअसल, आज विजय जुलूस निकाले जाने वाला था, उस पर रोक लगा दी गई है।

आरजी कर हत्याकांड के पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ पनिहाटी में 5,067 वोटों से आगे
भारतीय जनता पार्टी की रत्ना देबनाथ, जिन्हें आरजी कर हत्याकांड के पीड़ित की माता के रूप में जाना जाता है, पनिहाटी (111) में 13,784 वोटों के साथ आगे चल रही हैं। उनसे आगे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के तीर्थंकर घोष हैं, जिन्हें 8,717 वोट मिले हैं. 13 में से 2 दौर के मतदान के बाद रत्ना देबनाथ रत्ना देबनाथ से 5,067 वोटों से पीछे हैं। कलातन दासगुप्ता को 3,237 वोट मिले हैं, जबकि सुभाषिश भट्टाचार्य, साधना चक्रवर्ती और संजीव कुमार घोष को क्रमशः 153, 72 और 39 वोट मिले हैं।

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पश्चिम बंगाल चुनाव: दिल्ली जैसा हाल दोहराती कांग्रेस, राहुल गांधी की भूमिका पर चर्चा तेज

नई दिल्ली

राहुल गांधी का पश्चिम बंगाल चुनाव में करीब करीब उसी अंदाज में नजर आए, जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में देखे गए थे – और मुद्दे की बात यह है कि बंगाल के नतीजे भी दिल्ली जैसे ही लग रहे हैं. दिल्ली की ही तरह बंगाल में भी कांग्रेस के जीरो बैलेंस की ही संभावना नजर आ रही है. ये बंगाल का लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव है, जब पार्टी सीटों के हिसाब से शून्य प्राप्त करने जा रही है.

पश्चिम बंगाल चुनाव में राहुल गांधी की दिलचस्पी को उनके एक वीडियो से समझने की कोशिश की जा सकती है. पश्चिम बंगाल में जिस दिन दूसरे चरण की वोटिंग होनी थी, उस दिन राहुल गांधी ने ग्रेटर निकोबार प्रोजेक्ट पर बयान जारी किया था. 29 अप्रैल को सुबह आठ बजे (7:58 am पर) सोशल साइट X पर एक वीडियो पोस्ट कर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला था. राहुल गांधी ने वीडियो निकोबार के कैंपबेल बे में प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे आदिवासी नेताओं से मिलने के बाद बनाई थी. बाद में, सरकार की तरफ से राहुल गांधी के आरोपों का जवाब भी दे दिया गया.

कांग्रेस के कैंपेन के हिसाब से देखें तो राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव के दौरान दो बार पश्चिम बंगाल का दौरा किया है, और 5 रैलियां की हैं. 2024 के आम चुनाव में तो राहुल गांधी चुनाव प्रचार के लिए गए तक नहीं थे. 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी एक दिन के दौरे पर गए थे, और दो चुनावी रैलियां की थीं.

कहने को तो पश्चिम बंगाल कांग्रेस पूरे बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ा है, बंगाल कांग्रेस के बड़े नेता अधीर रंजन चौधरी भी विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन राहुल गांधी सिर्फ दो दिन के लिए रस्म अदा करने गए – आखिर पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर राहुल गांधी की रणनीति क्या थी?

मोदी पर गरम, ममता पर नरम
पश्चिम बंगाल में हुए दो चरणों के मतदान में हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, न ही उस दौरान किसी की जान गई है. चुनाव आयोग ने तो पहले से ही शांतिपूर्ण मतदान का दावा किया था. लेकिन, पहले चरण के मतदान के बाद 23 अप्रैल को आसनसोल में कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी. पश्चिम बंगाल कांग्रेस का आरोप है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े गुंडों ने ही पार्टी कार्यकर्ता की हत्या की है, जो राज्य में खत्म हो चुके कानून व्यवस्था का सबूत है.

राहुल गांधी ने भी सोशल साइट X पर एक पोस्ट में ऐसा ही आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने लिखा, 'कांग्रेस कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी की वोटिंग के बाद TMC से जुड़े गुंडों द्वारा की गई हत्या बेहद निंदनीय है. शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र नहीं, TMC का गुंडा राज चल रहा है. वोट के बाद विरोधी आवाजों को डराना, मारना, मिटाना – यही TMC का चरित्र बन चुका है.'

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पर्यावरण की ओर बड़ा कदम: हिसार में 3 एकड़ में तैयार होगा ई-बस स्टैंड

हिसार.

हिसार बस डिपो में इलेक्ट्रिक बसों के लिए अलग स्टैंड बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। इसके तहत करीब 3.09 एकड़ भूमि पर उगी झाड़ियों को जेसीबी व अन्य मशीनें मंगवाकर हटाया जा रहा है और निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है।

नया बस स्टैंड आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर और सुगम परिवहन सुविधा मिल सकेगी। डिपो में पहले ही पांच इलेक्ट्रिक बसें लाई जा चुकी हैं, जबकि पांच और बसें जल्द शामिल की जाएंगी। यह बस स्टैंड करीब 14 करोड़ रुपये की लागत में तैयार किया जाएगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद शहर में इलेक्ट्रिक बस सेवा को और मजबूती मिलेगी।

फिलहाल चलाई जा रही पांच बसों को आजाद नगर रूट व तोशाम रोड पर आधार अस्पताल तक चलाया जा रहा है। हिसार में 50 बसें लाने की योजना है। नया इलेक्ट्रिक स्टैंड बनाए जाने पर यहां कुल 10 इलेक्ट्रिक चार्जर स्थापित किए जाएंगे। जिनसे बसों को चार्ज किया जाएगा। इन बसों को विभिन्न रूटों पर चलाया जाएगा।

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आज शाम 6:30 बजे BJP मुख्यालय में PM मोदी कार्यकर्ताओं से करेंगे सीधी बातचीत

नई दिल्ली

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के रुझानों में भाजपा का प्रदर्शन बेहद मजबूत नजर आ रहा है. खास तौर पर पश्चिम बंगाल और असम में पार्टी भारी बढ़त के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ती दिख रही है. ताजा रुझानों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में भाजपा करीब 181  सीटों पर आगे चल रही है, जबकि असम में पार्टी 95 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। 

इन रुझानों के बीच पार्टी में उत्साह का माहौल है और जश्न की तैयारियां शुरू हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम करीब 6:30  बजे नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंचेंगे. यहां वह पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर सकते हैं और इस जीत के लिए उन्हें बधाई देंगे। 

पश्चिम बंगाल में भाजपा का यह प्रदर्शन खास तौर पर अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य लंबे समय से क्षेत्रीय दलों का गढ़ रहा है. ऐसे में पार्टी की यह बढ़त राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है. वहीं असम में भाजपा ने अपनी पकड़ बरकरार रखते हुए एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन किया है, जिससे पार्टी का आत्मविश्वास और बढ़ा है। 

इसके अलावा पुड्डुचेरी में भी भाजपा गठबंधन शानदार प्रदर्शन करता नजर आ रहा है और सरकार बनाने की स्थिति में दिख रहा है. यहां पार्टी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बहुमत हासिल करने के करीब पहुंच गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की इस बढ़त के पीछे उसकी आक्रामक चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूत पकड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अहम कारक रही है. हालांकि, अभी ये रुझान हैं और अंतिम परिणाम आना बाकी है. इसके बावजूद भाजपा खेमे में उत्साह चरम पर है. अब सभी की नजरें आधिकारिक नतीजों और उसके बाद बनने वाली सरकारों पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में इन राज्यों की राजनीतिक दिशा तय करेंगी। 

722 उम्मीदवार मैदान में
राज्य की 126 विधानसभा सीटों पर 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 59 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। कांग्रेस ने सबसे अधिक 99 उम्मीदवार उतारे, जिसके बाद भाजपा ने 90 उम्मीदवार उतारे। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा।

एनडीए सहयोगियों में, असम गण परिषद ने 26 उम्मीदवार उतारे, जबकि बोडो पीपुल्स फ्रंट ने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा। विपक्षी गठबंधन में राइजर दल ने 13 उम्मीदवार उतारे, असम जातीय परिषद ने 10, माकपा ने तीन और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा।

चुनाव मैदान में शामिल अन्य पार्टियों में आम आदमी पार्टी और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल शामिल हैं, जिन्होंने 18-18 सीटों पर चुनाव लड़ा। तृणमूल कांग्रेस ने 22 और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसके अलावा, 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं।

9 अप्रैल को हुआ मतदान
राज्य में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान 9 अप्रैल को हुआ, जिसमें 2.50 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मत का इस्तेमाल किया। इस बार कुल 85.96 प्रतिशत मतदान हुआ।

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चुनावी नतीजों पर संतोष सुमन का तंज, ममता से लेकर कांग्रेस तक पर तीखी टिप्पणी

नई दिल्ली

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) सेकुलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मंत्री संतोष कुमार सुमन ने अलग-अलग राज्यों से आए चुनाव परिणामों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व की जमकर सराहना करते हुए विपक्ष पर करारा तंज कसा है। संतोष सुमन ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में आज उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक पूरे विपक्ष की हालत 'झालमुड़ी' जैसी हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की राजनीति में विपक्ष अब पूरी तरह से अपनी प्रासंगिकता खो चुका है और जनता ने उनके एजेंडे को नकार दिया है।

'देशविरोधी ताकतों की कठपुतलियों के लिए जगह नहीं'
विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए संतोष सुमन ने कहा कि आज देश की राजनीति में विपक्षी दलों का हाल ऐसा हो गया है कि आम जनता उनकी असलियत समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक अब जागरूक हो गए हैं और वे यह भली-भांति जान चुके हैं कि देशविरोधी ताकतों के इशारे पर काम करने वाली कठपुतलियों के लिए हिंदुस्तान में कोई जगह नहीं बची है। जनता अब सिर्फ विकास और राष्ट्रहित की राजनीति को ही अपना समर्थन दे रही है।

विपक्ष को जमकर घेरा
अलग-अलग राज्यों के चुनाव परिणामों की समीक्षा करते हुए संतोष सुमन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 'ममता बुआ' की नीतियों और उनकी राजनीतिक सोच पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। वहां की जनता अब पूरी तरह से सत्ता में बदलाव का मन बना चुकी है। वहीं, असम का जिक्र करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की जमकर तारीफ की। सुमन ने कहा कि हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व में हुए विकास और उनकी निर्णायक राजनीति ने असम में विपक्ष को पूरी तरह से पीछे छोड़ दिया है। कांग्रेस नेताओं पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों में कांग्रेस के गौरव गोगोई और पवन खेड़ा का 'पेड़ा' बन गया है।

दक्षिण भारत में DMK से बढ़ रही है नाराजगी
दक्षिण भारत की राजनीति पर अपनी बात रखते हुए 'हम' के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि वहां भी विपक्ष के लिए स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में DMK की विचारधारा और उनके नेताओं द्वारा हाल ही में दिए गए कुछ विवादित बयानों को लेकर आम लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। जनता के बीच पनप रहा यह गुस्सा अब सीधे तौर पर वहां के राजनीतिक और चुनावी परिणामों में भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।

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