अनिर्वचनीय है उपकार का आनंद
भगवान महावीर ने कहा था कि संसार में लोक कल्याण, विश्वशांति, सद्भाव और समभाव के लिये अपरिग्रह का भाव जरूरी है। यही अहिंसा का मूल आधार है। परिग्रह की प्रवृत्ति अपने मन को अशांत बनाती है और हर प्रकार से दूसरों की शांति को भंग करती है। लेकिन आज हर बड़ी मछली छोटी मछली को…
