शांति सहरिया का अब अपना घर है, पक्की सड़क भी है, पानी की समस्या भी हो गई खत्म
भोपाल 'उसने अपनी जिंदगी में कभी ऐसे दिन भी देखे, जब उसके उदर में अन्न का दाना तक न था, सर छुपाने को कोई ठिकाना न था, उदासी थी, मायूसी थी और बस न-उम्मीदों का एक डरावना सा ताना-बाना था। पर दिन सबके बदलते हैं, उसके भी बदल गये। जिंदगी से अबतक जो दर्द मिले…
