सूचनाओं के महासागर में विवेक और जीवन-मूल्यों की राह दिखाता शिक्षक
सीपत सब धरती कागद करूँ, लेखनी सब बनराय। सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय॥” संत कबीरदास की ये पंक्तियाँ गुरु की महिमा को शब्दों में बाँधने की असमर्थता व्यक्त करती हैं। सच ही है, शिक्षक के योगदान को किसी एक दिवस या कुछ शब्दों में समेट पाना संभव नहीं। शिक्षक केवल…
