नई दिल्ली
शनिवार को BJP सांसद राघव चड्ढा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अचानक हुई मुलाक़ात ने चर्चाओं का बाज़ार गर्म कर दिया है. AAP के पूर्व नेता ने इस मुलाक़ात की तस्वीरें 'X' पर शेयर करते हुए इसे "यादगार सुबह" बताया. पंजाब विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले हुई इस मुलाक़ात ने राजनीतिक गलियारों में कई अटकलों को हवा दे दी है. शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की थी।
राघव चड्ढा ने इस साल की शुरुआत में AAP से बगावत करके छह अन्य सांसदों के साथ भाजपा का दामन थामा था. उन्होंने मुलाक़ात में हुई बातचीत का ब्योरा तो नहीं दिया, लेकिन इसे "ज्ञानवर्धक बातचीत" ज़रूर बताया।
चड्ढा ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का सौभाग्य मिला. यह एक विस्तृत और ज्ञानवर्धक बातचीत थी. उनके बहुमूल्य समय और उनसे मिली सीख व मार्गदर्शन के लिए मैं उनका दिल से आभारी हूं।
राघव चड्ढा पर बड़ा दांव खेल सकती है बीजेपी
चर्चा है कि बीजेपी उनके Gen Z से अच्छे कनेक्ट, तीन भाषाओं पर बढ़िया पकड़ के साथ पंजाब चुनाव में उनका इस्तेमाल करना चाहती है। राघव चड्ढा पहले राज्यसभा में बीजेपी के नए सांसदों के साथ पीएम नरेंद्र मोदी से मिले थे। इसकी तस्वीरें भी सामने आई थीं। अब उनकी वन टू वन मीटिंग से राजनीति को गरमा दिया है। एक्स पर राघव चड्ढा ने लिखा है कि एक ऐसी सुबह जिसे मैं हमेशा याद रखूंगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला। एक डिटेल्ड और अच्छी बातचीत हुई। उनके इतने समय और उनकी समझ और गाइडेंस से फायदा उठाने के मौके के लिए बहुत आभारी हूं।
Gen Z प्रोटेस्ट ने बदल दी है रणनीति
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जंतर-मंतर पर हुए Gen Z प्रोटेस्ट ने अब बीजेपी की रणनीति को बदल दिया है। पीएम नरेंद्र मोदी की नई टीम में अनुभवी से ज्यादा ऊर्जावान चेहरों का समावेश होगा। पीएम मोदी Gen Z से न सिर्फ कनेक्ट बढ़ा रहे हैं बल्कि एक बड़ी रणनीति पर काम कर रहे हैं। जो 2029 प्रभाव में रहेगी। ऐसे में राघव चड्ढा के अलावा कम उम्र के कई सांसदों की लॉटरी लग सकती है। राघव चड्ढा पूर्व में आम आदमी पार्टी के पोस्टर ब्वॉय रह चुके हैं। उनके पास अच्छी संवाद कला है। इतना ही नहीं वह सेलिब्रेटी फेस होने के साथ एक अच्छा बैकग्राउंड रखते हैं। राघव चड्ढा की मौजूदा उम्र 37 साल है। वह 31 साल की आयु में दिल्ली के विधायक बने थे।
क्यों हुई मुलाकात?
चड्ढा और प्रधानमंत्री की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब BJP ने विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब में अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज़ कर दी हैं. पंजाब में अगले साल चुनाव होने वाले हैं. चड्ढा राज्यसभा सांसद हैं, राज्यसभा में वे पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं. जालंधर से उनका पैतृक संबंध है, ऐसे में चुनाव में उन्हें अहम जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है।
चड्ढा AAP के शुरुआती दिनों से ही पार्टी से जुड़े थे लेकिन अप्रैल में एक बड़ा उलटफेर करते हुए वे छह अन्य सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे. कभी पंजाब के 'असली मुख्यमंत्री' माने जाने वाले राघव चड्ढा का पार्टी छोड़ना AAP के लिए एक बड़ा झटका था. झटका लगना तो लाज़मी है क्योंकि यही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां अभी AAP की सरकार है।
भाजपा में शामिल होने के बाद पहली मुलाकात
राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने के बाद उनकी पीएम मोदी के साथ पहली मुलाकात थी। राघव चड्ढा ने इससे पहले पीएम मोदी की तारीफ की थी। इस समय पीएम मोदी सबसे लंबे समय तक निवार्चित पीएम बने थे। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा था। राघव चड्ढा ने लंबा-चौड़ा पोस्ट करते हुए लिखा था कि इतिहास रच दिया गया है। उन्होंने लिखा था, "भारत आम तौर पर एक देश नहीं है। यह 1.4 अरब लोगों की सभ्यता है। 22 तय भाषाओं और सैकड़ों बोलियों की धरती; कई धर्मों, जातियों, समुदायों और पंथों की; अनगिनत क्षेत्रों और जीवन के तरीकों की, जो साथ-साथ रहते हैं। हम दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी हैं, जिसके वोटर लगभग 98 करोड़ हैं, जो पूरे यूरोप में रहने वाले लोगों से भी ज़्यादा है। यह हमारे चुनाव को शायद दुनिया भर में सबसे मुश्किल चुनाव बनाता है। फिर भी, इन 1.4 अरब लोगों में से, एक ही नेता को बार-बार देश की कमान सौंपी गई है। 2014, 2019, 2024 में भारत के लोगों से लगातार तीन बार जनादेश, हर बार विश्वास का नया काम। इतने बड़े और अलग-अलग तरह के देश का भरोसा एक बार भी जीतना कमाल की बात है। इसे बिना रुके तीन बार जीतना बहुत खास है।"
राज्यसभा की याचिका समिति के अध्यक्ष हैं राघव
राघव चड्ढा को मई में राज्यसभा की याचिका समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। राज्यसभा के सभापति सी.पी.राधाकृष्णन ने याचिका समिति का पुनर्गठन करने के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस समिति के लिए नामित किया था। समिति में चड्ढा के अलावा हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीडा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रवंगवरा नारजारी और संदोष कुमार पी. अन्य सदस्य हैं।
अब BJP के साथ जुड़ने पर, चड्ढा को कोई अहम भूमिका मिलने की उम्मीद है.
उन्हें न सिर्फ़ पंजाब की चुनावी राजनीति की अच्छी समझ है, बल्कि उनकी शहरी छवि भी BJP को अमृतसर, लुधियाना और जालंधर जैसे शहरों में अपनी पकड़ मज़बूत करने में सफलता दिला सकती है. खास तौर पर SAD से अलग होने के बाद, BJP को पंजाब में कारोबारी समुदायों और मिडिल-क्लास वोटरों के बीच अपना समर्थन बढ़ाने में थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है. ऐसे में चड्ढा मददगार साबित हो सकते हैं।
खास बात यह है कि चड्ढा की मुलाकात से पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी की सुखबीर सिंह बादल से मुलाकात हुई थी. ऐसे में, यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा अपने पुराने सहयोगियों के साथ फिर से रिश्ते सुधारने पर विचार कर सकती है।
अकाली दल, जिसकी हालत AAP के उभार के बाद से कमज़ोर हुई है भाजपा से मिलने के लिए इच्छुक नजर आ रही है. SAD अब सिमटकर तीन विधायक और एक सांसद तक रह गया है।
पंजाब में तेजी से बदलते राजनीतिक माहौल के बीच, अगर चड्ढा को कोई भूमिका मिलती है, तो क्या वे BJP की किस्मत बदल पाएंगे? यह तो आने वाले वक्त में ही पता चल पाएगा।
