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भारत की बेटियों ने बढ़ाया देश का मान, एशियन गेम्स में दिखी नारी शक्ति: निर्मला भूरिया

एशियन गेम्स में दुनिया ने देखा भारत की नारी शक्ति का दम

 निर्मला भूरिया

भोपाल

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को 85 पदक दिलाए और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारत के खाते में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक आए। इस उपलब्धि की सबसे गौरवपूर्ण तस्वीर यह है कि महिला खिलाड़ियों ने 38 पदक अपने नाम किए, जो पुरुष खिलाड़ियों के बराबर हैं। इनमें 11 स्वर्ण पदक महिला खिलाड़ियों और महिला टीमों ने जीते।

भारत की बेटियों का यह प्रदर्शन केवल खेल की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत और सशक्त होती नारी शक्ति की तस्वीर है। क्रिकेट में भारतीय महिला टीम ने स्वर्ण जीतकर देश का गौरव बढ़ाया, वहीं महिला कबड्डी और महिला हॉकी टीम ने भी स्वर्णिम सफलता हासिल की। महिला हॉकी टीम की स्वर्णिम वापसी विशेष रूप से ऐतिहासिक रही, जिसने 44 वर्ष बाद एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों की सफलता महिला सशक्तिकरण की सबसे प्रभावशाली तस्वीर है। आज हमारी बेटियां केवल खेल के मैदान में पदक नहीं जीत रहीं, बल्कि वे देश की करोड़ों बेटियों के सपनों को भी नई दिशा दे रही हैं। उनकी सफलता यह विश्वास मजबूत करती है कि बेटी को अवसर, प्रोत्साहन और विश्वास दिया जाए तो वह किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकती है।

व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी भारतीय बेटियों ने नए इतिहास रचे। कुमकुम मोहोड ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व में भारत के लिए पहला एशियन गेम्स स्वर्ण पदक जीता। महिला रिकर्व टीम ने भी स्वर्ण अपने नाम किया। निशानेबाजी में नीरू धांडा ने स्वर्ण पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन और परवीन हुड्डा ने स्वर्ण पदक जीते, जबकि गोल्फ में प्रणवी उर्स ने भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक हासिल किया। मीराबाई चानू ने भारोत्तोलन में रजत पदक जीतकर भारत के लिए इस खेल में लंबे अंतराल के बाद पदक दिलाया।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि में मध्यप्रदेश की बेटियों ने भी अपनी प्रतिभा और मेहनत का परचम लहराया। प्रदेश की क्रिकेटर क्रांति गौड़ भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा बनीं। छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचकर स्वर्ण पदक जीतना उनकी मेहनत और संघर्ष की प्रेरक कहानी है। निशानेबाजी में मध्यप्रदेश की नीरू ढांडा ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही उन्होंने ट्रैप मिक्स्ड टीम में भी स्वर्ण और महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। इस तरह नीरू ने एशियन गेम्स में तीन पदक जीतकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया। निशानेबाजी में ही मध्यप्रदेश की आशी चौकसे ने महिला 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि मनीषा कीर ने महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल कर देश का मान बढ़ाया। इसी तरह मध्यप्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय सेलर हर्षिता तोमर ने 49er FX महिला स्किफ ईवेंट में कांस्य पदक हासिल किया है।

भारतीय महिला हॉकी टीम की स्वर्णिम सफलता में भी मध्यप्रदेश की बेटियों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही। ईशिका चौधरी, बिच्छू देवी और सुशीला चानू भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं, जिसने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। एक बेटी की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि वह पूरे परिवार, समाज और देश की सोच को बदलने की ताकत रखती है। एशियन गेम्स में बेटियों की सफलता उन सभी परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो अपनी बेटियों को खेल, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, प्रशासन, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए वातावरण तैयार हुआ है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से लेकर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने तक की सोच अब जमीन पर दिखाई दे रही है। मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बेटियों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

एशियन गेम्स की बेटियों की सफलता हमें यह संदेश देती है कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं और नारों तक सीमित नहीं है। सच्चा सशक्तिकरण तब है, जब बेटी अपने सपनों का रास्ता स्वयं चुन सके, अपनी प्रतिभा को पहचान सके और अपनी मेहनत के बल पर दुनिया के सामने अपनी पहचान बना सके। आज कुमकुम मोहोड, नीरू धांडा, लवलीना बोरगोहेन, परवीन हुड्डा, प्रणवी उर्स, मीराबाई चानू और भारतीय महिला टीमों की उपलब्धियां देश की हर बेटी को यह संदेश दे रही हैं—आसमान कोई सीमा नहीं है।

एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों ने पदक जीतकर सिर्फ तिरंगा नहीं ऊंचा किया, बल्कि महिला सशक्तिकरण की नई इबारत भी लिखी है। यह उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी की बेटियों के लिए प्रेरणा बनेंगी और उन्हें यह विश्वास देंगी कि उनके सपनों को पूरा करने के लिए देश उनके साथ खड़ा है।

 

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