स्टारलिंक विवाद में मुकेश अंबानी और मोदी सरकार पर उठे सवाल, सुनील मित्तल ने मस्क को दिया जवाब

मुंबई 

अमेरिकी उद्योगपति एलॉन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की एंट्री में देरी को लेकर मुकेश अंबानी के बहाने मोदी सरकार पर सवाल उठाए थे. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने यहां तक पूछ लिया था कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? मस्क का आरोप था कि जियो जैसी कंपनियों के दबदबे के कारण भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को मंजूरी नहीं दी जा रही. उनके इस पोस्ट पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी थी और उनकी हां में हां मिलाया था। 

अब भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने इस पूरे विवाद के बीच अपनी कंपनी की तैयारी का हिसाब सामने रखा है. सुनील भारती मित्तल के जवाब से एलॉन मस्क के आरोपों और दावों की धज्जियां उड़ गई हैं. सुनील मित्तल का कहना है कि उनकी कंपनी एयरटेल ने 5 साल पहले सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए आवेदन किया था और उसका जमीनी नेटवर्क तीन साल से तैयार है. उनके इस जवाब से स्पष्ट हो गया है कि भारत में सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए मंजूरी के इंतजार में सिर्फ मस्क की स्टारलिंक ही नहीं, भारतीय कंपनियां भी खड़ी हैं। 

बुधवार को मस्क ने आरोप लगाया कि कुछ बड़े उद्योगपतियों ने अपनी मोनोपॉली बनाए रखने के लिए भारत में स्टारलिंक को रोक दिया है।

मस्क ने बिना नाम लिए किया था इशारा
मस्क ने किसी कंपनी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कहा, 'आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं।'

भारत के टेलीकॉम मार्केट में तीन प्राइवेट कंपनियां हैं- रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया।

मस्क की स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और यूटेलसैट वनवेब – ये तीन सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियां देश में सैटेलाइट सर्विस शुरू करने की होड़ में हैं।

सरकार ने देश में कामकाज शुरू करने के लिए इन तीनों सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों को लाइसेंस दे दिए हैं।

हालांकि, सर्विस शुरू करने से पहले सभी कंपनियों को स्पेक्ट्रम और सिक्योरिटी मंजूरी की जरूरत है।

सुनील मित्तल ने दी प्रतिक्रिया
जब मस्क के आरोपों पर मित्तल की राय पूछी गई तो इंडिया मोबाइल कांग्रेस में उन्‍होंने कहा, 'हम अपनी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।'

भारती ग्रुप की यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटकॉम पहली दो सैटकॉम कंपनियां थीं जिन्हें सर्विस के लिए लाइसेंस मिला था। लेकिन, उन्हें अभी भी सर्विस शुरू करने के लिए स्पेक्ट्रम और सिक्योरिटी मंजूरी नहीं मिली है।

जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया करने से इनकार कर दिया।

भाजपा ने राहुल और मस्क को दिया जवाब
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लाइसेंस मिलने में हो रही देरी को लेकर एलॉन मस्क का पक्ष ले रहे हैं. बीजेपी के उपाध्यक्ष राम माधव ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी और भेदभाव रहित होगी. उन्होंने मस्क को जवाब देते हुए कहा, 'आपको इस देश और उसके नेतृत्व के प्रति सम्मान भी रखना चाहिए. यहां स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए एक उचित व्यवस्था है, जो भेदभाव रहित है. जियो और एयरटेल भी स्टारलिंक के साथ इंतजार कर रहे हैं. भारत सरकार उचित समय पर पूरी तरह पारदर्शी और भेदभाव रहित तरीके से फैसला लेगी। 

डेटा सेंटर कारोबार में भी एयरटेल की बड़ी तैयारी
टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट के अलावा भारती एयरटेल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. कंपनी अपनी डेटा सेंटर क्षमता को करीब 300 मेगावाट से बढ़ाकर एक गीगावाट तक ले जाने की तैयारी में है. इसके लिए दक्षिण भारत, मुंबई और दिल्ली के आसपास विस्तार किया जा रहा है. कंपनी सॉवरेन क्लाउड सर्विस पर भी जोर दे रही है. इसका मकसद भारतीय कंपनियों, सरकारी एजेंसियों और रक्षा बलों को ऐसी सेवाएं देना है, जिनमें डेटा की सुरक्षा और उस पर देश का नियंत्रण अहम हो। 

एआई के लिए बनाए जाएं वैश्विक सुरक्षा नियम: मित्तल
सैटेलाइट इंटरनेट और डिजिटल कारोबार के साथ सुनील मित्तल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि इस तकनीक के लिए वैश्विक स्तर पर सुरक्षा नियम बनाए जाने चाहिए और सरकारों को किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए. उनके मुताबिक, ऐसे नियमों का उद्देश्य यूजर्स की सुरक्षा करना होना चाहिए, न कि नई तकनीक के विकास को रोकना. फिलहाल, स्टारलिंक के साथ भारतीय कंपनियों के लिए भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने का रास्ता अंतिम सुरक्षा मंजूरियों और स्पेक्ट्रम से जुड़ी प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है। 

सरकार ने भी रुख किया साफ
सरकार ने गुरुवार को अमेरिकी बिजनेस टाइकून एलन मस्क के इन आरोपों की आलोचना की कि स्टारलिंक की सैटकॉम सर्विस को रोका जा रहा है। यह साफ कर दिया कि देश में हर सैटकॉम लाइसेंसहोल्‍डर के लिए सिक्योरिटी नियमों का पालन करना जरूरी है।

टेलीकॉम मिनिस्ट्री ने कहा, सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस समेत सभी टेलीकम्युनिकेशन सर्विस के लिए एक निष्पक्ष और बिना भेदभाव वाला ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क बनाया है।

टेलीकॉम मिनिस्ट्री के अनुसार, लाइसेंस की शर्तों के तहत, ऐसे हर लाइसेंसहोल्‍डर को सिक्योरिटी शर्तों का पालन करना जरूरी है।

मिनिस्ट्री ने कहा, 'इसका मकसद यह पक्का करना है कि दी जाने वाली सर्विस सभी यूजर्स और उनके डेटा की सुरक्षा के लिए जरूरी सिक्योरिटी जरूरतों को पूरा करें। इस प्रोसेस के तहत तीनों लाइसेंसहोल्‍डर्स के लिए सिक्योरिटी असेसमेंट अभी चल रहा है।'

मंत्रालय ने कहा कि जब किसी लाइसेंस वाली कंपनी के लिए यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो वह स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए अगले कदम पर आगे बढ़ सकती है।

बयान में कहा गया, 'फिलहाल, तीनों कंपनियां मोटे तौर पर एक ही रेगुलेटरी स्टेज पर हैं। इसलिए, यह सुझाव कि फ्रेमवर्क या उसका लागू होना अनुचित या भेदभावपूर्ण है, बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।'

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जंग क्यों अहम?
सैटेलाइट इंटरनेट उन इलाकों में कनेक्टिविटी पहुंचाने का जरिया बन सकता है, जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क बिछाना मुश्किल है. पहाड़ी क्षेत्रों, दूरदराज के गांवों और देश के ऐसे हिस्सों में, जहां इंटरनेट की पहुंच सीमित है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। 

इस मार्केट में स्टारलिंक के अलावा भारती एयरटेल ग्रुप की कंपनी यूटेलसैट वनवेब और रिलायंस की जियो सैटकॉम भी मौजूद हैं. ऐसे में मंजूरी से जुड़े नियम सिर्फ मस्क की कंपनी स्टारलिंक तक ही नहीं, बल्कि भारतीय कंपनियों के लिए भी उसी निष्पक्षता से काम कर रहे हैं. भारती एयरटेल ग्रुप की यूटेलसैट वनवेब अफ्रीका में सैटेलाइट सेवाएं शुरू करने के लिए अलग-अलग कंपनियों के साथ साझेदारी भी कर रही है। 

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