ब्रेकिंग न्यूज

राज्य स्थापना दिवस हमारी विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव: राज्यपाल पटेल

राज्यपाल पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के  स्थापना दिवस समारोह में हुए शामिल
लोकभवन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिखी “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” संकल्पना की झलक

भोपाल
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” संकल्पना के तहत भारत के सभी राज्यों के स्थापना दिवस के आयोजन की पहल अत्यंत सराहनीय और दूरदर्शी है। यह भारत की विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव है। एक-दूसरे के राज्यों की संस्कृति को जानने, समझने और गर्व करने का पावन प्रसंग है। हमारी गौरवशाली भारतीय संस्कृति की अमूल्य परंपराओं और अनेकता में एकता के शाश्वत भाव को साकार करने का आयोजन है। राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के गठन की स्मृतियों को संजोने और भारत की संघीय व्यवस्था, सांस्कृतिक वैभव और अखंडता के गौरव का पर्व है। उन्होंने कहा कि राज्यों के स्थापना दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उन राज्यों की लोक कला, संस्कृति की झलक को को करीब से देखने का अवसर मिलता है। सभी प्रस्तुतियां समृद्ध भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।

राज्यपाल पटेल मंगलवार को लोकभवन में 01 नवंबर को गठित मध्यप्रदेश सहित पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के स्थापना दिवस के संयुक्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने उक्त सभी प्रदेशवासियों को उनके राज्य स्थापना दिवस की बधाई दी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। सभी प्रतिभागियों को ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। लोकभवन के सांदीपनि सभागार में आयोजित समारोह में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

मध्यप्रदेश सत्कार, सद्भाव और अपनेपन की भूमि
राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारा देश, विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है। जहाँ विविध भाषाएँ, वेश-भूषा, परंपरा, लोक कला और जीवन मूल्यों का दर्शन होता है। मध्यप्रदेश की धरती ने सभी को सदैव अतिथि सत्कार, सद्भाव और अपनापन दिया है। यहां बसे दूसरे प्रदेशों के नागरिक हमारे परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की उपजाऊ धरती, कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, उद्यमशीलता और समृद्ध मानव संसाधन देश की आर्थिक प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं। हरियाणा के नागरिक परिश्रमी, अनुशासित और प्रतिभाशाली है, जो खाद्य सुरक्षा, खेल उत्कृष्टता, विनिर्माण और सैन्य योगदान से भारत का मान बढ़ा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की जनजातीय विरासत, ऊर्जा क्षमता, खनिज, वन और जल संपदा आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। चंडीगढ़ की आधुनिक नगर योजना, स्वच्छता, हरित क्षेत्र और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संस्थान देश की सुशासन संस्कृति को नई दिशा प्रदान करती हैं।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रदेशों का योगदान यह बताता है कि भारत का विकास विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं और क्षमताओं के समन्वय से ही आगे बढ़ रहा है। दिल्ली भारत की राजधानी होने के साथ देश की नीतिगत दिशा, आर्थिक गतिविधियों तथा राष्ट्रीय एकता के भाव एवं भावना को और अधिक सशक्त करती है। जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक संपदा, कृषि, बागवानी, पर्यटन और हस्त शिल्प देश की अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक-सांस्कृतिक समरसता को समृद्ध बनाती है। उन्होंने कहा कि लद्दाख की सामरिक भौगोलिक स्थिति, सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं, प्राकृतिक संसाधन और विशिष्ट जैव विविधता सतत एवं समावेशी विकास का संदेश देती है।

युवा आपसी संवाद बढ़ाएं, अन्य प्रदेशों की कला-इतिहास को जानें,
राज्यपाल पटेल ने उपस्थितजनों का आह्वान किया कि भारत को विकसित और विश्व गुरू बनाने में हमेशा अपना योगदान दें। एक-दूसरे की कला, संस्कृति और भाषा का सम्मान करें। भावी पीढ़ी को देश की विविधता की शक्ति से अवश्य परिचित कराएं। युवा आपसी संवाद बढ़ाएं, अलग-अलग प्रदेशों की कला और इतिहास को जानें, मिलकर नवाचार और सेवा के कार्य करें। उन्होंने इन सभी प्रदेशवासियों को संकल्प भी दिलाया कि देश के उपलब्ध संसाधनो, प्रतिभाओं और क्षमताओं का समुचित उपयोग करते हुए विकास के नए कीर्तिमान बनाएंगे। सभी मिलकर आगे बढ़ेंगे। देश के सांस्कृतिक, प्राकृतिक, पारंपरिक और आधुनिक विकास में सक्रिय योगदान देकर, आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित भारत का सपना साकार करेंगे।

राज्यपाल पटेल का कार्यक्रम के प्रारंभ में भोपाल पंजाबी समाज के प्रतिनिधि जे.पी.एस अरोणा, हरियाणवी समाज के प्रतिनिधि ओमप्रकाश खुराना और छत्तीसगढ़ राज्य सांस्कृतिक परिषद के प्रतिनिधि राजेश कुमार कर्ष एवं सदस्यों ने पुष्पगुच्छ, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।

समारोह में पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के परिचय पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत पंजाब की ओर से गुरूवाणी, लोकगीत बन्ना-बन्नी और गिद्धा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। हरियाणा राज्य की ओर से लोक संस्कृति पर आधारित आकर्षक नृत्य प्रस्तुति दी गई। छत्तीसगढ़ राज्य की ओर छत्तीसगढ़ी लोक संगीत और शक्ति उपासना पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। अंत में मध्यप्रदेश के विकास और वैभव से परिचित कराने वाली लघु फिल्म का प्रसारण किया गया। आभार भोपाल पंजाबी समाज के प्रतिनिधि जे.पी.एस अरोणा ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन लोकभवन नियंत्रक हाउस होल्ड श्रीमती शिल्पी दिवाकर ने किया। इस अवसर पर राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के मध्यप्रदेश में निवासरत नागरिक और लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *